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MPPCHS में कैशलेस इलाज (Cashless) और क्लेम (Claim) की पूरी प्रक्रिया

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MPPCHS गाइड टीम
📅 11 जुलाई 20266 मिनट👁 17 views
MPPCHS में कैशलेस इलाज (Cashless) और क्लेम (Claim) की पूरी प्रक्रिया

मध्य प्रदेश पावर कंपनी कैशलेस स्वास्थ्य योजना (MPPCHS) का सबसे बड़ा फायदा यह है कि बीमारी के समय आपको पैसों का इंतज़ाम करने के लिए परेशान नहीं होना पड़ता। लेकिन यह सुविधा तभी मिलती है जब आपको कैशलेस इलाज (Cashless Treatment) और क्लेम (Reimbursement) के सही नियम पता हों।

क्या होगा अगर आप किसी ऐसे अस्पताल में चले जाएं जो योजना से जुड़ा नहीं है? या अगर अस्पताल आपसे 25% पैसे (Co-pay) मांग ले?

इस आर्टिकल में हम आसान भाषा में समझेंगे कि अस्पताल में भर्ती होने से लेकर डिस्चार्ज होने और पैसों का क्लेम पास होने तक की पूरी प्रक्रिया क्या है।


विषय सूची (Table of Contents)

  1. कैशलेस इलाज कैसे काम करता है? (Network Hospitals)
  2. 5 तरह के अस्पताल और Co-pay नियम (क्या आपको पैसे देने होंगे?)
  3. नॉन-नेटवर्क अस्पताल (Non-Network) में इलाज और क्लेम
  4. इमरजेंसी (Emergency) में इलाज के नियम
  5. क्लेम रिजेक्ट होने पर क्या करें? (Grievance)
  6. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. कैशलेस इलाज कैसे काम करता है? (Network Hospitals)

MPPGCL द्वारा चुनी गई ISA (Implementation Support Agency) ने देशभर के कई छोटे-बड़े अस्पतालों के साथ समझौता (Tie-up) किया है। इन अस्पतालों को नेटवर्क अस्पताल (Network Hospitals) कहा जाता है।

अगर आप किसी नेटवर्क अस्पताल में इलाज कराते हैं, तो प्रक्रिया बहुत आसान है:

  1. अस्पताल पहुंचें: अस्पताल के 'TPA या कैशलेस डेस्क' पर अपना MPPCHS Health Card (e-Card) या Employee ID दिखाएं।
  2. अप्रूवल: अस्पताल आपकी बीमारी और खर्च का एस्टीमेट बनाकर ISA को भेजेगा। ISA कुछ ही घंटों में अप्रूवल दे देगा।
  3. कैशलेस इलाज: आपको इलाज का कोई पैसा नहीं देना होगा (Co-pay को छोड़कर)। अस्पताल सीधा ISA को बिल भेजेगा और ISA आपके खाते (Coverage Limit) से पैसे काटकर अस्पताल को दे देगा।
  4. डिस्चार्ज: डिस्चार्ज के समय आपको सिर्फ बिल पर साइन करने होंगे।

2. 5 तरह के अस्पताल और Co-pay नियम (क्या आपको पैसे देने होंगे?)

Co-pay (को-पे) का मतलब है कि बिल का कुछ प्रतिशत हिस्सा आपको अपनी जेब से देना होगा, जिसकी बाद में भरपाई (Reimbursement) नहीं की जाएगी। MPPCHS में अस्पतालों को 5 श्रेणियों (Categories) में बांटा गया है:

श्रेणी (Category) अस्पताल का प्रकार को-पेमेंट (Co-pay) आपको कितना देना होगा?
श्रेणी-1 सी.जी.एच.एस. (CGHS Plus) रेट पर अनुबंधित अस्पताल 0% (पूरा कैशलेस)
श्रेणी-2 सभी सरकारी, चैरिटेबल और PSU अस्पताल 0% (पूरा कैशलेस)
श्रेणी-3 नॉन-CGHS रेट पर अनुबंधित प्राइवेट अस्पताल 25% (यानी ₹1 लाख के बिल पर ₹25,000 आपको देने होंगे)
श्रेणी-4 ISA की ग्रुप कंपनी से जुड़े अस्पताल 30%
श्रेणी-5 आयुर्वेद (Ayurveda), योग, नेचुरोपैथी अस्पताल 50%

सलाह: इलाज के लिए हमेशा 'श्रेणी-1' या 'श्रेणी-2' के अस्पतालों को प्राथमिकता दें ताकि आपका पूरा इलाज फ्री (0% Co-pay) में हो सके।

3. नॉन-नेटवर्क अस्पताल (Non-Network) में इलाज और क्लेम

अगर आप अपनी मर्जी से किसी ऐसे अस्पताल में इलाज कराते हैं जिसका MPPCHS या ISA के साथ कोई समझौता (Tie-up) नहीं है, तो उसे नॉन-नेटवर्क अस्पताल कहा जाता है।

इसमें क्लेम कैसे मिलता है?

  1. खुद भुगतान करें: अस्पताल में इलाज का पूरा खर्च आपको अपनी जेब से देना होगा।
  2. बिलों को सुरक्षित रखें: डिस्चार्ज समरी, सभी असली (Original) बिल, दवाइयों की पर्चियां और लैब रिपोर्ट्स अपने पास सुरक्षित रखें।
  3. क्लेम जमा करें: डिस्चार्ज होने के एक निश्चित समय (आमतौर पर 30 दिन) के अंदर, ISA के ऑनलाइन पोर्टल पर या उनके ऑफिस में क्लेम फॉर्म के साथ सभी दस्तावेज़ जमा करें।
  4. प्रतिपूर्ति (Reimbursement): आपका क्लेम पास होने के बाद पैसा आपके बैंक खाते (या सैलरी/पेंशन) में आ जाएगा।

⚠️ महत्वपूर्ण नियम: नॉन-नेटवर्क अस्पताल का बिल भले ही कितना भी हो, आपको पैसा सिर्फ सी.जी.एच.एस. (CGHS Plus) दरों के हिसाब से ही मिलेगा। अगर अस्पताल ने ज़्यादा पैसे लिए हैं, तो बचा हुआ पैसा आपको अपनी जेब से भरना पड़ेगा।

4. इमरजेंसी (Emergency) में इलाज के नियम

मेडिकल इमरजेंसी (जैसे हार्ट अटैक, एक्सीडेंट) के समय मरीज की जान बचाना सबसे ज़रूरी होता है। ऐसे में MPPCHS के नियम बहुत लचीले (Flexible) हैं:

  • अगर आस-पास कोई 'नेटवर्क अस्पताल' नहीं है, तो आप मरीज को किसी भी नज़दीकी 'नॉन-नेटवर्क' अस्पताल में भर्ती कर सकते हैं।
  • आपको 24 घंटे के अंदर ISA के टोल-फ्री नंबर पर कॉल करके इमरजेंसी की सूचना देनी होगी।
  • डिस्चार्ज होने के बाद आप नियमानुसार अपने बिलों का क्लेम (Reimbursement) कर सकते हैं।

5. क्लेम रिजेक्ट होने पर क्या करें? (Grievance)

कभी-कभी दस्तावेज़ पूरे न होने या नियमों की अनदेखी के कारण ISA आपका क्लेम रिजेक्ट कर सकती है या कम पैसे दे सकती है।

  • शिकायत निवारण (Grievance Redressal): अगर आप ISA के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं, तो आप योजना के लिए बनाए गए शिकायत निवारण कक्ष (जैसे जबलपुर शक्ति भवन, ब्लॉक-9 में हेल्प डेस्क) में अपील कर सकते हैं।
  • कॉल सेंटर: आप ISA द्वारा जारी किए गए 24x7 टोल-फ्री नंबर या ईमेल पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

6. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Q1. क्या ओपीडी (OPD - बिना भर्ती हुए इलाज) का खर्चा मिलेगा?
उत्तर: नहीं। MPPCHS योजना के तहत फिलहाल केवल अस्पताल में भर्ती (IPD/Hospitalization) होने पर ही कैशलेस या क्लेम की सुविधा मिलती है। सामान्य सर्दी-बुखार या OPD चेकअप इसमें कवर नहीं होते हैं।

Q2. मुझे कैसे पता चलेगा कि अस्पताल कौन सी श्रेणी (Category 1, 2, 3) का है?
उत्तर: आप MPPCHS के ऑनलाइन पोर्टल (mppchs.mpez.co.in) पर जाकर 'Network Hospitals' की सूची देख सकते हैं। सूची में हर अस्पताल के नाम के आगे उसकी श्रेणी और Co-pay प्रतिशत लिखा होता है।

Q3. अगर मैं 25 लाख वाले प्लान में हूँ और बिल 30 लाख का आता है, तो क्या होगा?
उत्तर: योजना सिर्फ आपकी कवरेज लिमिट (₹25 लाख) तक का ही भुगतान करेगी। ऊपर के ₹5 लाख आपको अपनी जेब से देने होंगे।

Q4. क्लेम पास होने में कितना समय लगता है?
उत्तर: आमतौर पर सभी सही दस्तावेज़ जमा करने के बाद 15 से 30 कार्य दिवसों (Working Days) के अंदर प्रतिपूर्ति (Reimbursement) आपके खाते में आ जाती है।


नोट: सटीक नियमों की पुष्टि के लिए आधिकारिक पोर्टल (mppchs.mpez.co.in) या अपने HR विभाग से संपर्क करें।

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