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MPPCHS vs राज्य कर्मचारी स्वास्थ्य योजना (State Employee Scheme)

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MPPCHS गाइड टीम
📅 11 जुलाई 20264 मिनट👁 6 views
MPPCHS vs राज्य कर्मचारी स्वास्थ्य योजना (State Employee Scheme)

मध्य प्रदेश सरकार के सामान्य विभागों के कर्मचारियों के लिए जहाँ राज्य कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा योजना (State Government Employees Health Scheme) या सामान्य मेडिकल प्रतिपूर्ति (Medical Reimbursement Rules) लागू हैं, वहीं बिजली विभाग (Power Companies) के कर्मचारियों के लिए विशेष रूप से MPPCHS का संचालन किया जाता है।

दोनों ही योजनाएं राज्य स्तर पर काम करती हैं और मध्य प्रदेश के निवासियों को लक्षित करती हैं, लेकिन इनके प्रशासनिक ढाँचे, प्रीमियम दरों, बिल क्लेम प्रक्रियाओं और सुविधाओं में गहरे अंतर हैं।

इस लेख में हम मध्य प्रदेश राज्य सरकार की सामान्य कर्मचारी योजना और बिजली कर्मचारियों की MPPCHS योजना के बीच के अंतर को स्पष्ट करेंगे।


विषय सूची (Table of Contents)

  1. दोनों योजनाओं का संक्षिप्त परिचय
  2. State Employee Scheme vs MPPCHS (तुलनात्मक विवरण)
  3. प्रीमियम और अंशदान दरों का अंतर
  4. कैशलेस चिकित्सा की सीमा और रेफरल प्रक्रिया
  5. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. दोनों योजनाओं का संक्षिप्त परिचय

  • राज्य कर्मचारी स्वास्थ्य योजना: यह मध्य प्रदेश के सभी शासकीय विभागों (जैसे शिक्षा, गृह, राजस्व) के नियमित लोक सेवकों और पेंशनरों के लिए है। इसके तहत सामान्यतः सीमित चिकित्सा सुविधाओं और पुराने रीइम्बर्समेंट नियमों का पालन होता है।
  • MPPCHS: यह केवल म.प्र. की छह बिजली कंपनियों (MPPGCL, MPPKVVCL, MP Transco आदि) के नियमित/संविदा कर्मियों और पेंशनरों के लिए है, जिसका नियंत्रण ऊर्जा विभाग और बिजली कंपनियों के स्वतंत्र ट्रस्ट के अधीन है।

2. State Employee Scheme vs MPPCHS (तुलनात्मक विवरण)

तुलना का बिंदु (Feature) राज्य कर्मचारी योजना (State Scheme) MPPCHS
कंट्रोलिंग अथॉरिटी वित्त विभाग/लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग बिजली कंपनियों का स्वतंत्र ट्रस्ट / MPPGCL
मासिक प्रीमियम पद के ग्रेड पे (Grade Pay) के अनुसार अनिवार्य कटौती ₹500, ₹1000 या ₹2000 (स्वैच्छिक विकल्प अनुसार)
कैशलेस लिमिट सामान्यतः ₹5 लाख तक का सालाना कैशलेस ₹5 लाख, ₹10 लाख या ₹25 लाख तक का कवर
संविदा कर्मियों की स्थिति कई विभागों में संविदा कर्मियों को लाभ सीमित निर्धारित प्रीमियम के साथ संविदा कर्मी पूर्ण पात्र
क्लेम रिफंड दरें म.प्र. सिविल सेवा (चिकित्सा परिचर्या) नियम अनुसार पूर्णतः CGHS (Central Govt Rates) Plus दरों पर

3. प्रीमियम और अंशदान दरों का अंतर

  • राज्य कर्मचारी योजना में प्रीमियम का निर्धारण स्वैच्छिक नहीं होता है, बल्कि आपके सैलरी ग्रेड पे के अनुसार एक निश्चित राशि काटी जाती है।
  • MPPCHS में कर्मचारी को लचीलापन मिलता है। वे अपनी बचत और बीमारी की आशंका के अनुसार कम प्रीमियम (₹500 में 5 लाख कवर) या अधिक प्रीमियम (₹2000 में 25 लाख कवर) चुन सकते हैं।

4. कैशलेस चिकित्सा की सीमा और रेफरल प्रक्रिया

  • सामान्य राज्य कर्मचारी योजना के अंतर्गत प्राइवेट अस्पतालों में सीधे भर्ती और कैशलेस इलाज की प्रक्रिया अक्सर जटिल होती है, और अधिकांश मामलों में कर्मचारियों को इलाज के बाद बिल दफ्तरों में जमा करने पड़ते हैं।
  • MPPCHS पूरी तरह से आधुनिक ISA (Implementation Support Agency) और डिजिटल हेल्थ कार्ड प्रणाली पर आधारित है। अस्पतालों में भर्ती होने से लेकर डिस्चार्ज तक की पूरी प्रक्रिया TPA डेस्क के माध्यम से तुरंत कैशलेस हो जाती है।

5. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Q1. क्या कोई राज्य कर्मचारी अपनी इच्छा से MPPCHS में शामिल हो सकता है?
उत्तर: नहीं। MPPCHS योजना विशेष रूप से केवल मध्य प्रदेश की बिजली कंपनियों के कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए ही आरक्षित है।

Q2. यदि पति राज्य सेवा में और पत्नी बिजली कंपनी में है, तो क्या वे दोनों कार्ड का उपयोग कर सकते हैं?
उत्तर: हाँ, दोनों अपने-अपने विभाग के नियमों के अनुसार अलग-अलग कार्ड बनवाकर अपनी संबंधित योजनाओं का लाभ ले सकते हैं।


नोट: सटीक नियमों की पुष्टि के लिए आधिकारिक पोर्टल (mppchs.mpez.co.in) या अपने HR विभाग से संपर्क करें।

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